
देहरादून। एंटीमाइक्रोबियल रेज़िस्टेंस (AMR) की बढ़ती चुनौती को गंभीरता से लेते हुए गवर्नमेंट दून मेडिकल कॉलेज में एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई बैठक की अध्यक्षता प्राचार्या डॉ. गीता जैन ने की, जिसमें विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष (HOD), माइक्रोबायोलॉजी, फार्माकोलॉजी एवं अस्पताल प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक में अस्पताल स्तर पर नई एंटीबायोटिक पॉलिसी शीघ्र लागू करने पर विस्तृत चर्चा की गई जिसमें निर्णय लिया गया कि प्रत्येक विभाग अपनी OPD एवं IPD के लिए स्पष्ट एंटीबायोटिक प्रिस्क्रिप्शन गाइडलाइन तैयार करेगा, जिससे “Watch” और “Reserve” श्रेणी की एंटीबायोटिक्स के अनावश्यक उपयोग को रोका जा सके।
प्राचार्या डॉ. गीता जैन ने निर्देश दिए कि उच्च श्रेणी (Higher/Reserve category) की एंटीबायोटिक्स का उपयोग केवल विभागाध्यक्ष की संस्तुति पर ही किया जाएगा साथ ही अस्पताल-स्तरीय एंटीबायोग्राम के आधार पर प्रिस्क्रिप्शन, 48–72 घंटे में एंटीबायोटिक रिव्यू, तथा नियमित ऑडिट प्रणाली लागू की जाएगी।
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि मेडिकल छात्रों एवं रेजिडेंट डॉक्टरों के लिए AMR जागरूकता एवं एंटीमाइक्रोबियल स्टेवार्डशिप प्रशिक्षण को अनिवार्य बनाया जाएगा।प्राचार्या ने कहा कि AMR एक “Silent Pandemic” के रूप में उभर रहा है और तर्कसंगत एंटीबायोटिक उपयोग ही इसका प्रभावी समाधान है। संस्थान प्रदेश में जिम्मेदार एंटीबायोटिक उपयोग का मॉडल स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
